हुनर के जल्वे!

           हुनर के जल्वे!

हुनर कहाँ-कहाँ नहीं होता? भारत के इस छोटी-सी दुनिया में,कितने लोग अपना गुज़ारा कर लेते हैं पर साथ-ही-साथ वे अपनी चाहत,ख़्वाइश या सपनों को पीछा नहीं छोड़ते| डान्स ईंडिया डान्स एक ऐसा प्रोग्राम है जो ज़ी टी.वी द्वारा अयोजित सभी लोगों को एक मंच प्रदान करता है अपना हुनर दिखाने के लिए|

इस प्रोग्राम के ३ Judges -Geeta Kapoor,Terence Lewis  और  Remo D’souza|Mithun Chakraborthy तो इस show के Grand Master हैं| 

Season 1 से  लेकर Season 3  तक एक से एक बढ़कर आए और हरेक की अपनी-अपनी Styles में Expert थे|पहले Season में सलमान विजयता बने जिनको बॉलीवुड के सलमान ख़ान के साथ perform करने का अवसर प्राप्त हुआ|

 

 

 

 

 

 

Season 2 में शक्ति विजयता बनी और उसको भी बॉलीवुड फ़िल्म में performance करने का मौका मिला और फ़िल्म थी “Rowdie Rathore“।

विजयता तो शक्ति बनी पर उसके अलावा एक और Participant था जिसका नाम था धर्मेश।  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सब उनको Dharmesh Sir बुलाते थे क्योंकि वे ख़ुद दूसरों को डान्स सिखाते थे और गीता माँ का लाडला था!ये रहा उसकी की एक छोटी-झलक जिसको देखते ही आप भी उसके Fan बन जाओगे!

ये रही बात बड़ों के डान्स के जल्वों का!अब इन छोटों की क्या बात?इन्हें तो “डान्स के बाप” कहा जाता है!इन “बापों” के लिए निकाया गया Dance India Dance Lil masters!

 

Season 1  में विजयता बने जीतुमोनी!  

 

 

 

 

 

 

लेकिन उसके अलावा रुतुराज और वैश्नवी के जल्वों की क्या बात!! ये देखिए:-

 

Season 1 के बाद  Season 2  आया जो अभी हाल ही में समाप्त हुआ और इसके विजयता बने फ़ैज़ल ख़ान! Auditions में ही उसने गीता माँ का दिल जीत लिया था,यहाँ तक कि गीता माँ ने ख़ुद कहा कि फ़ैज़ल इतना अच्छा डान्स करता है कि उनकी अब एक ख़्वाइश है कि अगर उनका कोई बेटा हो तो बिल्कुल फ़ैज़ल की तरह नाचे!ये रही उसकी Auditions वाली performance:-

इस विडियो  को देखने के बाद कितना अच्छा लगता है या यों कहिए कि कितना गर्व महसूस करते हैं कि एक ग़रीब परिवार का लड़का,इतने से छोटे से उम्र में ही न सिर्फ़ अपने माँ-बाप,बल्कि अपने देश का नाम भी रोशन कर रहा है!     

 

 

 

 

 

 

 

 

Season 2  के इस show में एक और छोटे उस्ताद थे जिनका नाम था जीत!ख़ैर उनकी जीत तो नहीं हुई पर उनकी पहली performance से ही उनको दुनिया के “आँठवें अजूबे” का नाम दिया गया और ख़ुद Katrina Kaif  ने उनको छोटा Michael Jackson कहा था।ये देखिए उनका मस्त भड़ा अंदाज़:-

महत ६ साल का लड़का कितना अच्छा नाच लेता है!लेकिन इनके टक्कर में,थी एक लड़की!जो न सिर्फ़ जीत पर बल्कि चारों लड़कों पर भाड़ी थी!नाम था सौम्या!सब उसे “जापानी गुड़िया” कहते थे!खाती बहुत थी पर मंच पर आके वो अपना Double Performance  देती और सभी का दिल जीत लेती!

ये एक Live Show ऐसा था जो सब लोग देखते थे और इसको सराहते भी थे!सभी अब इसी ताक में कि कब उसका नया Season निकलेगा और इसी उत्साह के साथ इनको देखेंगे!अब जो निकलनेवाला है वो पहले season  के “डान्स के बापों ” और दूसरे season के “डान्स के बापों” के साथ होगी टक्कर!पेश है उसकी एक छोटी-सी झलक:-

इस Show की एक खासियत है कि competition के साथ-साथ सब लोग मस्ति भी करते थे!चाहे वो छोटा हो या बड़ा!इस मंच पर न सिर्फ़ प्रतियोगी बल्कि हमारे बॉलीवुड सिनेमा के सितारे और ज़ी.टी.वी. द्वारा आयोजित हमारे हिंदी serials  के सितारे भी इस show के हिस्सा बने:-                        

 

 

 

 

 

 

 

 

यहाँ तक कि Season 2 का एक participant राघव जिसको लोग Crockroch नाम से जानते हैं,उन्होंने तो Bipasha Basu  को अपने Slow Motion वाले अंदाज़ में propose भी किया था।ये देखिए:-

 

 

इन तीनों seasons को देखकर तो मुझे बहुत मज़ा आया,अब मुझे “Dance ke Superkids” वाले show का बेसबरी से इंतज़ार है!

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हिंदी ज्ञान हमारा मान!

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हिंदी ज्ञान हमारा मान!

कौन कहता है कि केवल भारत में हिंदी को प्रधानता दी जाती है? कभी मॉरीशस के इस छोटे-से टापु में भी तो झाँककर देखिए कि कितने हिंदी प्रेमी आपको मिलेंगे! प्राथमिक स्तर से लेकर विश्व विद्यालय तक,हिंदी की ख़ूब पढ़ाई होती है|यहाँ तक कि हर साल हमारे बच्चे हिंदी में स्नातक बनने के लिए मॉरीशस विश्व विद्यालय में भरती के लिए आते हैं| मॉरीशस में एम.जी.आई. नामक संस्थान,हिंदी प्रेमियों को न सिर्फ़ शिक्षा प्रदान करता है वरन छात्रों के लिए अनेक गतिविधियों आदि का आयोजन भी करते हैं|

अभी कुछ-ही दिनों में विश्व-भर में “हिंदी-दिवस” मनाया जाएगा,विशेषकर भारत में,लेकिन हम मॉरीशस वासी भी इससे अछूटे नहीं हैं|”हिंदी-दिवस” मनाने के लिए हमारे हिंदी छात्रों के लिए अनेक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए इनाम भी दिए जाते हैं| महात्मा गांधी संस्थान में तो इलोक्यूशन,अंत्याक्षरी,स्वरचित कविता पठन एवं नुक्कड़ नाटक जैसी प्रतियोगितओं  का आयोजन किया जाता हैं जिनमें छात्र उत्साहपूर्वक उनमें भाग लेते हैं|

इसके अलावा,जब हम मॉरीशस में हिंदी की चर्चा करते हैं तब “हिंदी संगठन” का नाम विशेष रूप से पहले आता है क्योंकि इसी संगठन ने हिंदी को इतना महत्व दिया है और उसे समृद्ध बनाने में योगदान दिया|हिंदी संगठन का उद्देश्य ही है कि वह हिंदी भाषा के बोलचाल के स्वरूप तथा साहित्य-सृजन को प्रोत्साहित करे और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान के कार्यक्रमों द्वारा संस्कृति का प्रचार करे|

इसके अतिरिक्त,संगठन बाल पत्रिका “सुमन” का प्रकाशन करता है|”वार्षिकी” के प्रकाशन में संगठन मॉरिशस देश में छपी हुई हिंदी की पुस्तकों के बारे में जानकारियाँ प्रदान करती है|इसके अलावा,वह एम.बी.सी रेडियो पर “ज्ञान-सरोवर” नाम का एक साप्ताहिक कार्यक्रम भी चलाता है जिसमें हर आयु के लोग सम्मिलित होकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हैं और हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर चिंतन-मनन करते हैं|अपनी गतिविधियों को केवल पत्रिकाओं एवं रेडियो तक सीमित न रहकर,वह टी.वी. पर भी कार्यक्रम एवं वार्ताएँ आयोजित करता है| इन सब चीज़ों के अलावा,हिंदी शिक्षण को और बढ़ावा के लिए,अनेक पुस्तकालयों की स्थापना भी की गईं है|त्रिओले में एक पुस्तकालय है जहाँ हमारे हिंदी भाषा-भाषी लोग उसका पूरा लाभ उठाते हैं और हमारे अन्य संस्थानों में भी पुस्तकालय उप्लब्ध हैं जैसे कि एम.जी.आई और आई.जी.सी.सी.आई. इत्यादि|

हमारे स्थानीय लेखकों ने भी हिंदी को बढ़ावा देने में  बहुत बड़ा योगदान दिया है जैसे कि:-अभिमन्यु अनत,मुनिश्वरलाल चिन्तामणी,रामदेव धुरंधर,हेमराज सुनदर,पूजानन्द नेमा,सुमति बुधन,राज हीरमन,सोमदत्त बखोरी इत्यादी|इन लेखकों के नाम केवल मॉरीशस में ही नहीं वरन भारत में भी उन्होंने प्रसिद्धि पाई है|अभिमन्यु अनत जी को तो मॉरीशस के प्रेमचन्द कहा जाता है|

आज इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि मॉरीशस में हिंदी के क्षेत्र में बहुत प्रगति किया जा रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हिंदी को एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में देखेंगे|यह एक चुनौती है उन सभी लोगों को जो समझते हैं कि हिंदी भाषा कमज़ोर है,हिंदी कमज़ोर  नहीं है बल्कि आप लोगों की सोच कमज़ोर है! हम हिंदी वाले भी किसी से कम नहीं हैं!!

शादी का बंधन!

शादी का बंधन!

शादी का बंधन!

कितना पवित्र बंधन होता है,

पर अगर आज के युग में देखें
तो इसको कम महत्व दिया जाता है..
छोटी बातों को लंबी बनाना,
झगड़े के कारण,तनावग्रस्त होने के कारण
इस पवित्र रिश्ते को एक काग़ज़ के बल पर,
तलाख़ के बल पर तोड़ा जा रहा है…

कल हो ना हो!!

कल हो ना हो!!

कल आज और कल में
क्या अंतर है?
कल वो है जो बीत गया
आज वो है जो हम जी रहे हैं
और कल के बारे में किसी को नहीं पता…
जो बीत गया,सो बीत गया
जो आज है,उसे जी भरके जीना है
आने वाले कल के बारे में
सोचना बेकार है…
इसीलिए चाहे दु:ख हो या सुख
एक मुस्कान के साथ उसे जी लेना चाहिए
क्या पता कल हो ना हो!!

धरती का इंसान

धरती का इंसान

ईश्वर!
धरती का हर इंसान,
धरती के हर किसी दूसरे इंसान को,
ऊपर उठते देख,
नीचे खींच लेता है!
इसीलिए धरती से जब भी तुमने,
किसी इंसान को ऊपर बुलाया,
तब भी धरती के किसी दूसरे इंसान ने,
उसके लिए गड्ढा खोदा
और उसे नीचे दफ़ना दिया!

जवान..

जवान..

“भावी कर्णधार हैं हम जवान!”
ऐसा सब हैं कहते,पर
जब हम जवान को एक मौका
देने की बात है आती
तो ये अफ़्सरवादी लोगों के
हाथ क्यों हैं लड़खड़ाते?
ठोकर खा-खाकर,
ज़िन्दगी से ऊबकर,
ये ही जवान हताश होकर
कभी आत्महत्या भी कर जाते हैं..
मौका नहीं देंगे तो आगे कैसे बढ़ पाएँगे?
यहाँ तक कि राजनीति के पद पर
लगभग सभी नेतागण बूढ़े हैं

जहाँ जाओ वहाँ बूढ़े लोग ही हैं
जो इस देश को चला रहे हैं
फिर हम जवानों का भविष्य,
क्या खाक अच्छा होगा?

बढ़ते चलो

बढ़ते चलो

बढ़ते चलो,बढ़ते चलो…
सीना तान के चलो,
झुकाओ ना नज़र,पीछे ना मुड़ो,
बढ़ते चलो,बढ़ते चलो…

दूर तक सोचो,आवाज़ बुलंद करो
लड़खड़ाओ मत,डगमगाओ मत
आत्म-विश्वास के साथ आगे चलो,
बढ़ते चलो,बढ़ते चलो…

मुट्ठी को कर मज़बूत इतना कि
दुश्मन देखकर ही हार जाए!
अहंकार से नहीं,स्वाभिमान से चलो,
बढ़ते चलो,बढ़ते चलो…

बीति बातों को भुलादो
होगा कुछ न फ़ायदा उनसे
कल की सोचो,भविष्य की सोचो,
बढ़ते चलो,बढ़ते चलो…

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