शादी

शादी 
जब किसी परिवार में किसी लड़की का जन्म होता है तब उसके माता-पिता,दो मालियों के समान अपनी बेटी को फूलों की तरह सींचते हैं ताकि कोई भी काँटा उनकी फूल जैसी बच्ची को चुभ न पाए।जैसे-तैसे वह बड़ी होती है,तैसे-तैसे उनकी चिंताएँ भी बढ़ती हैं कि कहीं प्रौढ़ता की कमी के कारण वह फिसल न जाए या कोई ऐसा ग़लत क़दम न उठाले, जिससे उसका या उसके परिवार का नाम बदनाम हो।इसीलिए हर समय,प्यार से, बेटियों को अच्छी या बुरी चीज़ों के बारे में अवगत करानी चाहिए।
 
कहते हैं कि बेटियाँ, विशेषकर अपने पिताजी से ज्यादा गुलती- मिलती हैं लेकिन व्यवहार में ,वे अपनी माओं के समान होती हैं।जब वही बेटियाँ २०-२२ साल की हो जाती हैं तब उनकी शादी के बारे में सोचने लगते हैं।जिस बेटी को उन्होंने इतने प्यार से देखभाल किया,उसी का हाथ किसी और के हाथों में सोंप देते हैं।तब भी उन्हें यही चिंता रहती है कि उनकी बेटी खुश रहेगी या नहीं?
 
कितनी कठिन परीक्षा होती है उनकी बेटियों की शादी के समय में!!दिल पर पत्थर रखकर,अपनी लाडली बेटी का कन्यादान करते हैं।उसी “कन्यादन” से आभास होता है कि अब बेटी हुई पराई!!
लड़कियों का भविष्य भी देखिए!जन्म लेने के पश्चात,उसे शादी के बाद,अपने माँ-बाप का घर छोड़कर किसी दुसरे परिवार को अपनाना पड़ता है और नए रिश्ते बानाने पड़ते हैं!वाह रे नियती!!
 
लेकिन क्या लड़कियों का भविष्य सिर्फ़ शादी तक ही सीमित है?
अगर लड़की को पढ़ा-लिखाकर,आत्म-निर्भर बनाकर तथा एक अच्छी नौकरी प्रदान कर दिया जाए तो क्या, शादी ही अगला फ़ैसला होता है स्वीकार करने के लिए?
 
अगर वही लड़की काम करके,अपने माता-पिता की सेवा करना चाहती है और शादी नहीं करना चाहती है तो समाज इसमें क्या बुराई पाता है?
 
संबंध-विच्छेद के बढ़ते मामलों के कारण,अगर कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती तो इसमें क्या बुरी बात है?
 
मानती हूँ कि सभी लड़के एक जैसे नहीं होते हैं,लेकिन फिरभी इसकी क्या Guaranty है कि वह लड़का उस लड़की को वही प्यार,सम्मान,ऐशो-आराम दे पाएगा जो उसके माँ-बाप ने उसे दिए हैं?
 
यह अपने-आप में ही एक बहुत बड़ा प्रश्न-चिह्न है।
 
मैं विवाह के विरुद्ध नहीं हूँ पर मैं यही संदेश देना चाहती हूँ उन सभी लड़कियों को कि शादी का फ़ैसला एक बहुत ही अहम फ़ैसला होता है!सोच-समझकर ही यह कदम उठाना चाहिए।
ऐसा न हो कि हम बाद में पचताएँ या अपने-आप को, हम उस कठ-घरे में पाएँ, जहाँ हम भी दूसरी महिलाओं के समान तलाख माँग रहे हों!!