सामुहिक बलात्कार…

कहाँ गई मर्दांगिनी?कहाँ गई इनसानियत?
क्या इस धरती पर,लड़कियों और महिलाओं को हमेशा ऐसे अत्याचार सहने होंगे?कहते हैं लड़की देवी की रूप होती है,उसको पूजना चाहिए…लेकिन दूसरी ओर उस पर हाथ उठाया जाता है,पाँव तले डबाया जाता है,भद्दी गालियाँ सुनाई दी जाती हैं,उसे घर के चार दिवारी में क़ैद की जाती हैं,अपनी प्रतिक्रियाओं को व्यक्त नहीं कर पाती हैं,हर पल मरती हैं….हर पल….लेकिन आज जो हम सब देख रहे हैं,एक लड़की का बलात्कार….वह भी एक सामुहिक बस में!!क्या उन ६ व्यक्तियों को ज़रा भी तड़स नहीं आया?जानवरों की तरह उसका बलात्कार किया और इतने बेरहमी से मारा कि…..क्या नशे में धुत व्यक्तियों कि मति इतने भ्रष्ट हो जाती हैं?अरे क्या बिगाड़ा था उस लड़की ने उनका?…..सुनते ही रोंगटें खड़े हो जाते हैं और आँखों में पानी….लड़ते-लड़ते वो चल बसी…साथ ही लोगों के दिलों-दिमाग़ में आक्रोश की भावना दे गई…इस जंग में न जाने कितने घायल हुए और एक जवान पुलिसवाले की जान भी गई!क्या मिला उनको ये सब करके?आज वे सलाखों के पीछे तो हैं किन्तु क्या लौटा पाएँगे उस लड़की की जान और उसकी मुस्कराहट को?लौटा पाएँगे उसकी इज़्ज़त को?लौटा पाएँगे उस खोई हुई परिवार की शान को?????

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