राम नवमी

राम नवमी 

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चैत्र सूदी की नवमी को राम-जन्म है। त्रेतायुग में प्रभु रामचंद्र जी ठीक १२ वर्ष दिन में कौशल्या की गोद हरी-भरी करने के लिए उतरे ।

अभी हम वर्तमान के कलिकाल के पाँच हज़ार बर्ष बिता चुके हैं।यदि प्रभु रामचंद्र जी त्रेतायुग के अन्तिम चरण में ही प्रकट हुए होंगे तो उनका आना ९ लाख  वर्ष पहले जा सकता है।

उनके धरती पर आने के दिवस में पाँच पुन ग्रहों का प्रभाव पड़ा रहा था ।वे पुनर्वस्तु नक्षत्र में हुए थे । उस समय सूर्य,शनि,गुरू और शुक्र ग्रह एक साथ धरती पर प्रभाव कर रहे थे।

वालमीकि जी ने रामायण को लिखकर आर्य धर्म बड़ा पड़ा उपकरा किया । वे आदि कवि कहलाए। श्री रामचंद्र जी ने अपने जीवन को वेदाज्ञाओं के अनुसार व्यतीत करके वेद-ज्ञान की भी रक्षा की ।

रामलीला ने पूरे हिन्दू-वंशजों को सद चरित्र कराना सिखाया । श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने साधारण आम भाषा में रामचरित मानस लिखकर धार्मिक विचार-धारा को बहाते हुए अपने लोगों पर बड़ा उपकार किया है । श्री राम-कथा के विषय में यह गाया जाता है :-

यावत्स्थास्यन्ति गिरय: सरितश्च महीतले ।

तावद्रामायणकथा लोकेषु प्रचारिष्यति ।।

अर्थात,जब पहाड़ और नदियाँ धरती पर हैं तब तक रामकथा लोकों में होती रहेगी । इसी बात का प्रमाण मुझे आज,ब्रह्मस्थान के अमरनाथ कैलाशनाथ मन्दिर में मिला जहाँ लोगों ने आज भ्री मात्रा में आकर,राम नवमी मनाया । बच्चे,बूढ़े,जवान,सभी लोग कितनी श्रद्धा से राम का नाम ले रहे थे । कहते हैं कि राम से बड़ा राम का नाम है ।  इसी उद्देश्य से सभी लोग राम का नाम लेकर उनका गुणगान कर रहे थे ।

इसके अतिरिक्त,मुझे उन पँक्तियों ने प्रभावित किया जो मैंने महीनों से नहीं सुना था । रामायण का पाठ करके आज दिल को कितना सुकून प्राप्त हुआ और इससे ज़्यादा खुशी मुझे तब हुई जब लोग तालियों से चौपाइयों का गान कर रहे थे :-

मंगल भवन अमंगल हारी ।

द्रवहुसुदशरथ अजिरबहारी ।।

रघुनाथ जी की ओर देख-देख के,
रघुनाथ जी की ओर देख-देख के।

सीताजी धीरज धरी देवों को मनाने,
सीताजी धीरज धरी देवों को मनाने।

मेरे राम…मेरे राम…

हमारे युवक!

हमारे युवक! 

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बढ़ते चलो,बढ़ते चलो
किसी की मत देखो,किसी की मत सोचो
अपने आप बढ़ते चलो

तुम हो देश के युवक
सीना तान कर चलो
चाहे आँधी आए या तूफ़ान
तुम कभी लड़खड़ाना मत!
खुद को कर बुलंद इतना कि
जो चाहो वो पा सको!

ये दिन हैं तुम्हारे और ये रातें भी हैं तुम्हारी
सदुपयोग कर इनका,और देख 
भविष्य कितना सुन्दर और न्यारा होगा!
औरों की छोड़ो फ़िकर,
ये तो हैं ही तुम्हारे इर्दगिर्द 
अफ़्वाहें फैलाने वाले,बाधाएँ उत्पन्न करने वाले
पर तुम डटकर सामना कर इनका!

अपनी इच्छाओं को व्यक्त करो तुम!
अपनी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति करो तुम!
कभी डरो किसी से
हिम्मतकर आगे बढ़ते चलो
बढ़ते चलो,बढ़ते चलो….