ठुकरा दो मुझे… तुम्हारी वफ़ा की काबिल नहीं…

 

ठुकरा दो मुझे… तुम्हारी वफ़ा की काबिल नहीं…

 

crying-heart

अपनी ही  नज़रों में गिर चुकी हूँ मैं….
कितनी बार माफ़ किया तूने मुझे
कितनी बार नज़रंदाज़ किया मेरी इन ग़लतियों को…
कितनी बार तुमको दु:ख पहुँचाया है मैंने…
अपनी ही नज़रों में गिर चुकी हूँ मैं..
नहीं कर सकती तुम्हारा सामना
नहीं है मुझमें हिम्मत
नहीं रहे अब हम पहले की तरह…
मेरी  ग़लती है….
हो सके तो मुझे माफ़ करना
इसके अलावा मेरे पास और कोई अल्फ़ाज़ नहीं है….
जा रही हूँ मैं….
अब तुम्हें और परेशान नहीं करूँगी
कभी भी अपनी शकल नहीं दिखाऊँगी
मुझ जैसी दोस्त किसी को न मिले…
नहीं हूँ इसके क़ाबिल…

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