कोई अनजाना

अनजाने शहर में
अनजानी दुनिया में
अनजाने लोगों के बीच में
किसी ने आकर मेरा हाथ थामा था
मुझपर भड़ोसा करके कहा था
“डर मत! मैं हूँ तेरे साथ! मेरा विश्वास कर!”
लेकिन मैंने आज उसी का दिल दुखाया
रूठा है मुझसे
कोस रही हूँ मैं अपने आप को
जिसने मेरा भला चाहा
मैंने उसी का दिल बहुत दुखाया…..

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पचतावा

पचतावा

तुम हो तो ज़िंदगी है

तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं

तुम्हीं वो शक्ष हो जिसने मुझे जीना सिखाया

प्यार करना सिखाया

और मैंने तुम्हीं को धोखा दिया

आज तुम ऐसे रूठ के चले गए

कि मैं कुछ भी नहीं कर पाई

कल तुम नहीं रहोगे

हमेशा के लिए जा रहे हो

और मैं एक पल के लिए भी

तुम्हें मिल नहीं सकती

कितनी लाचार हूँ मैं

कितनी बुरी हूँ मैं

कभी किसी को मुझ जैसी दोस्त न मिले…