अतीत

अतीत

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अतीत को डर के मारे,
खामोश किया जाता  है।
पर कहीं-न-कहीं वही अतीत
हमारे आज में,
शोर बनकर तूफ़ान की तरह
टपक पड़ता है….

दर्द भरा प्यार

दर्द भरा प्यार

ना पाई मैंने खुशियाँ,
और ना मिला मुझे साथ उसका।
पर सज़ा का एलान हो गया।
चाहे मैं ऐसे ही आँसू पीते-पीते मर क्यों ना जाऊँ,
पर सहारा देने के लिए,
अपना हाथ तक आगे नहीं बढ़ाएगा।

नुक्कड़ नाटक: नशा

नुक्कड़ नाटक: नशा

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सब लोग साथ में मिलकर : हल्ला बोल! अब मुँह खोल! सबको बता! नशा है क्या!! सबको बता! हिंसा पर से लोगों को बचा!!

राजीव और अमित :- क्यों करते लोग नशा? भड़ोगे नशा रग़ों में तो कर देगा लाचार! उठो! घोट दो गला नशे का, ये सबसे कहता है, नुक्कड़ मौन नहीं रहता है, नुक्कड़ मौन नहीं रहता है!

बाकि प्रश्न करते हैं:- तो क्य कहता है नुक्कड़?
राजीव और अमित:- तो सुनो!
राजीव और अमित:- (रजीव नशे में धुत) (अमित उसे सँभालता हुआ गीत गाता हुआ आ रहा है)
अमित:- चल मेरे भाई, चल मेरे भाई, चल मेरे भाई, चल मेरे भाई! (परेशान है राजीव को इस हालत में देखकर)

(सुर में गाता है) कितनी बार बोला शराब नहीं पीना। तू सुन्न हो गया है, तू टुन्न हो गया है। तू बात ना मेरी मान मेरे भाई!!

राजीव:- रहने दो छोड़ो अब जाने दो यार,( आवाज़ बुलन्द करके) जो नशा ना करे, वो है बेकार!!!

अमित:- तू अभी भी नहीं समझता मेरी बात? चल आ, दिखाता हूँ तुझे कलियुग की हालत!

राजीव:- हाँ हाँ दिखा, दिखा!

(दोनों अपनी-अपनी जगह पर बैठ जाते हैं और मीना, मोहित और राज सामने आते हैं)

(घर का वातावरण। मीना रसोईघर में खाना बना रही और उधर राज और उसका मित्र मोहित, नशे में धुत अन्दर आए)

रज और मोहित ( गाते हुए घर में प्रवेश) :- एक कलासी दो कलासी तीन कलासी चार! (राज बैठ जाता है)

मोहित:- ए मीना चल खाना ला! ए मीना, कहाँ मर गई? चल खाना ला। सुनती नहीं क्या?

मीना (परेशान):- ना लाए हो सफ़्ते में एक कांदा! ना आलू आदा। बच्चे बरे हैं बीमार! तो क्या पकाए मीना?

मोहित:- जा! खुद कर ले काम! कमा ले पैसा! ले आ सब्ज़ि! और बना ले खाना अपने और बच्चों के लिए!

मीना:- तू कमाता कितना है? हम पड़ोसियों से माँग-माँगकर थक गए हैं। (परेशान बैठ जाती है)

राज (दोनों की बातें सुनकर उठ खड़ा होता है) :- अरे! छोड़ यार! क्या सुननी इसकी बात! चलते हैं! मौज मस्ति करते है! खाएँगे, नाचेंगे और देखेंगे!
(राज और मोहित साथ-साथ चले जाते हैं)

उधर राजीव और अमित उठ खरे होते हैं और अमित रजीव से कहता है:- देखा तूने! बीवी है लाचार। बच्चे बरे हैं बीमार!
(राजीव नींचे बैठ मीना को देखता है)

अमित:- पति के हैं ऐसे विचार!!

राजीव:- हाँ हाँ! तू कर रहा है लाख पते की बात! लेकिन ये तो ग़रीब हैं। इनकी ऐसी ही कटती है रात! कुछ और बात बता!

अमित:- चल आ! बताता हूँ तुझे दूसरों की बात!

(सब बैठ जाते हैं) (अगला सीन)

(दिलदार जो एक बहुत बड़े पंजाबी का बेटा है। Sunny Deol का role करते करते सामने आता है। नाचता हुआ आता है Sunny Deol के अन्दाज़ में और बाकि सब गा रहे हैं।)

सब मिलके:- यारा ओ यारा! मिलना दोबारा! यारा ओ यारा! मिलना दोबारा!

दिलदार:- जब ये दो किलो का हाथ किसी पर पड़ता है न, तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है!!

(मोहित उठकर धमेंद्र की तरह नाचता हुआ आता है। वो दिलदार के पिता की भूमिका निभाता है। )

सब साथ में:- मैं जट यमला पगला दिवाना! हो रब्बा इतनी सी बात न मानि के! के!

दिलदार ( गाने को काटत हुआ):- पा! पा! पा!

मोहित:- ओए पुत्तरररर दिलदारररर!

दिलदार:- पापा मैंने कहा था पापा! Say No to Alcohol!

पापा (मोहित):- Time तो अच्छे से बिता न?

दिलदार:- Time ठीक से गुज़रा पापा! पर….
सब मिलकर:- उस रात हम दो बजे तक पिया।
पैसा कैसा कैसा पैसा, सारी दोषी पैसा…

पापा:- ओए पुत्तर जी!Payment solid हुई थी यार!

दिलदार:- पर पापा party कहाँ है मेरी पापा?
पापा (नशा करते हुए):- ओए पुत्तर की बात कर दी तूने? अरे आज मेरे यार अपने farmhouse में party रखी है, special तेरे लिए। अरे Johny Walker का इन्तज़ाम किया है यार, और तो और, बड़ा surprise है!

(अमित और राज यह देखकर आगे आते हैं।)

अमित:- ये देखो! ग़रीबों से लेके अमीरों तक, सब को लगी है इसकी लत! बाप बेटे को बिगाड़ रहा है! अभी भी नहीं है तू मेरी बात से सहमत?

(राज मूँह फेड़ लेता है, नहीं मानता)

अमित:- चल आ दिखाता हूँ तुझे आज की युग का करम!

राज:- हाँ हाँ दिखा!

(सब बैठ जाते हैं)

बीच में नैना आती है और उसको देखकर श्लोक और मोहित अपने परेशानी व्यक्त करते हैं।)

श्लोक:- ला ला ला! कुछ ना मिला। ला ला ला! कुछ ना मिला। अरे यार! कुछ ना मिला!

मोहित:- काश! कुछ मिला जाए! थक चुका हूँ दूर से देखते देखते! काश! कुछ मिल जाए!

नैना:- क्या हुआ है तुम दोनों को? इतने tension में क्यों हो?

श्लोक:- क्या बताऊँ यार? माल नहीं मिलता।

नैना:- माल? अरे मैं तुम लोगों को दिलाती हूँ माल! (दिलदार अब First year student है।)
उसको को देखकर नैना कहती है:- वो देखो! नया बकड़ा आया है!

श्लोक:- ए first year!
मोहित:- ए इधर आ!
श्लोक:- अरे यार डर मत! बात सुन! चल, बता कुछ! माल-वाल मारता है क्य?

दिलदार:- सर, मैं कुछ समझा नहीं!

नैना:- हम समझाते हैं।

(तीनों उसके इर्द-गिर्द घूमते हुए गाते हैं)

कॉलर को थोड़ा-सा ऊपर चढ़ाके। सिगरेट के धुएँ का छल्ला बनाके।

बाकि सब :- दो महीने बाद! (After 2 months)

(नैना,दिलदार, श्लोक और मोहित फ़र्श पर बैठे और नशे में धुत!)
सब मिलकर तीनों के साथ गाते हैं:- दम मारो दम….. मिट जाए ग़म! बोलो सुबह शाम हरे कृष्णा हरे राम!

(दिलदार बेहोशा हो जाता है।)

नैना:- अरे अब जाकर असर हुआ है इसपर! ( हँसती है।)

मोहित:- अरे नहीं यार! मामला गंभीर है! अबे छोड़ो इसे भागो!
(तीनों भाग जाते हैं।)

राज:- (भागता हुआ दिलदार के पास पहुँचता है।) क्या हुआ है इसे? ये उठ क्यों नहीं रहा है?

अमित:- अब तो समझ में आ गया है न तुझे? (जनता को भी कहता है) और आप सब को भी पता चला कि नशे से कितना नुकसान पहुँचाया जा सकता है?

राज:- हाँ हाँ! आ गई बात समझ में। लेकिन तू क्या चाहता है? जाके मैं जंगल में जप-तप करूँ?

अमित:- नहीं। इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। बताता हूँ मैं कुछ और solutions.

मीना:- हमारे देश में कितने Rehab centres हैं जहाँ हमें इन problems का solutions मिल सकता है|

नैना:- To get rid of alcohol you should first of all, get rid of temptations and avoid bad influences.

मोहित:- अरे! ये सब तो दूर की बात है! अगर आप के अन्दर सच्ची Will power है तो ही आप इन सब से छुटकारा पा सकते हैं। तो चलो हम सब मिलकर ” Say No To Alcohol केहते है!
No To Alcohol! No To Alcohol!

सब मिलकर फिरसे आवाज़ बुलन्द करके केहते हैं:- हल्ला बोल! अब मुँह खोल! सबको बता! नशा है क्या!! सबको बता! हिंसा पर से लोगों को बचा!!

गंगा

गंगा

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गंगा की बात करूँ?
गंगा की बात करूँ?
वह जूझ रही खुदसे
और बदहवास है
न अब वो रंग-रूप है,
न अब वो रंग-रूप है
न अब वो मिठास है।
गंगा जली है,जल नहीं गंगा के पास।
बाधों की जाल में कहीं,
बाधों की जाल में कहीं
लहरों की जाल में।
सर पीट-पीट रो रही
शहरों की जाल में।
नाले सता रहे,
नाले सता रहे
पनाह ले रहे सता रहे,
खा-खाके पान वाले सता रहे।
असहाय है!
असहाय है, लाचार है, मजबूर है
अब अस्मिता से अपनी कहीं दूर है गंगा।
आई थी बड़े शौक़ से,
आई थी बड़े शौक़ से
शंकर को छोड़कर, विष्णु को छोड़कर
वो अपने घर को छोड़कर।
खोई थी अपने-आप में वो कैसी घड़ी थी,
खोई थी अपने-आप में वो कैसी घड़ी थी
सुनते ही भगीरथ की तेर दौड़ी थी।
महिमा है ये पूर्वजों की, गरिमा है ये देश की!
मुक्ति का द्वार भी हमेशा,
मुक्ति का द्वार भी हमेशा
इसी से खुला है,
काशी गवाह है कि यहाँ सत्य तुला है।
केवल नदी नहीं है!
केवल नहीं है, संस्कार है गंगा!
जन्म-जाति देश का श्रंगार है गंगा।
जिससे भी मिली गंगा,
जिस्ससे भी मिली गंगा आदर से मिली है।
नींचे उतर कर, दौड़कर, सागर से मिली है।
जो कुछ भी आज हो रहा गंगा के साथ है,
जो कुछ भी आज हो रहा गंगा के साथ है
क्या आपको पता नहीं इसमें किसका हाथ है?
देखिए न! देखिए न, आज क्या गंगा का हाल है!
रहना मुहाल है इसका, जीना मुहाल है।
गंगा के पास गर्द है,
गंगा के पास गर्द है
आवाज़ नहीं नहीं है…
मुँह खोलने का कुल में रिवाज़ नहीं है।
कुछ कीजिए उपाय!
कुछ कीजिए उपाय
प्रदूषण भगाइए
गंगा में आँच आ रही, गंगा बचाइए।