कश्ति रूपी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी एक डूबती हुई जहाज़ के समान है,
जो समुन्दर में तूफ़ान के समय,
हवाओं के रुख से लड़कर,
तेज़ रफ़्तार से चली आ रही ज्वारभाटाओं से जूझकर,
धैर्य व आशा की ज्योत लेकर,
आगे बढ़ने की साहस करती है।
भले ही ज़िन्दगी में कितने ही ज्वारभाटाओं के समान मुश्किलें क्यों न आये,
पर हमें उनसे डटकर, दॄढ़ता के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करनी चहिए।
इसी का नाम ज़िन्दगी है।

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नव वर्ष

नव वर्ष

नया साल आया!
थोड़ी खुशियाँ और थोड़े ग़म लेकर
ज़िंदगी भी अजीब पहेली है।
कहाँ आप दूसरों के लिए जीते थे और कहाँ उन्हीं लोगों ने आपको अपनी ज़िंदगी से बेदखल कर दिया…
क्या बीतती होगी उन वृद्ध माता-पिता पर, कैसे सही होगी ऐसी पीड़ा…
साल, महीने, दिन…. ये बीतते जाएँगे पर,
हमारी सोच, हमारा व्यवहार कब बदलेंगे?
क्या ऐसी मनाई जाती है नव वर्ष?