ज़िंदगी क्या है?

किसी ने पूछा ज़िंदगी क्या है?
मैंने इस बारे में सोच-विचार किया।
लेकिन इस प्रश्न का उत्तर भला क्या हो सकता है??
आज की दुनिया में उसकी परिभाषा क्या हो सकता है?
संघर्ष, यत्नाएँ, कोशिशें, परेशानियों से जूझना, तृष्णाओं की पूर्ति करना इत्यादि।
शान्ति, अमन, खुशियाँ जैसी भावनाएँ तो मिलती ही नहीं है।
सभी लोग तरक्की कर रहे हैं, भाग-दौड़ में लगे हुए हैं, पैसे जुटाने में लगे हुए हैं।
इसका परिणाम, लोगों के मन में लालच, ईर्ष्या, घमंड जैसी दुर्भावनाएँ पनपने लगी हैं।
तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, दायाबिटीज़ जैसे रोगों के शिकार बनते जा रहे हैं।
क्या ऐसी ज़िंदगी की चाह थी हमें?

Laisse l’amour regagner nos cœurs.

Ecoute cette eau froide bruire à travers ces hautes branches ;
Ecoute la voix de l’amour, qui vers toi, encore s’épanche.
Admire la beauté de cette nature, de toutes ces fleurs,
Laisse l’amour regagner nos cœurs.